मैं तुम्हारा कवि हूँ!

पहली बार जब विद्रोहीजी की कविता सुनी तो मन तृप्त हो गया। कहीं अंदर से आवाज आई – ऐसा होता है कवि ! इच्छा हुई की जानूँ इस कवि के बारे में। क्या यह कवि भी पैन पेंसिल से कविताएँ लिखता है या कोरा मन ही इसका कागज है? क्या कवि होना इसकी अभिव्यक्ति का हिस्सा है या इसकी अभिव्यक्ति ही एक कवि होना है?

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अलविदा मंगलेश डबराल!

कोरोना वायरस ने बहुत कुछ छीन लिया है इस दुनिया से। कई ऐसी क्षतियाँ हुई हैं जिनकी भरपाई करना इतनी आसानी से संभव नहीं होगा। 09 दिसंबर, 2020 को ऐसी ही एक क्षति के समाचार ने लोगों को स्तब्ध कर दिया। लोगों के प्रिय कवि, लेखक, पत्रकार, संपादक व अनुवादक मंगलेश डबराल नहीं रहे।

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