गोरीपार का धर्मेन्द्र

कुछ दिन पहले एक युवा कलाकार से मुलाकात हुई – धर्मेन्द्र जेष्ठा। फिर यूट्यूब पर धर्मेन्द्र का काम देखा। अपने कैमरे के माध्यम से मुझे वह उन जगहों पर ले गया जिसके बारे हम अक्सर सोचते रह जाते हैं – वहाँ, उस पहाड़ी के पीछे का दृश्य कैसा होगा ?

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क्या ऑनलाइन शिक्षा का दौर आ चुका है?

कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जहाँ चाह वहाँ राह। अपनी इस चाहत के चलते मनुष्य ने आजतक अपने मूलभूत अनुभवों से उपजी समझ को ज्ञान के नए-नए रूपों का आकार दिया और धीरे-धीरे उसे परिमार्जित और संश्लेषित कर प्रस्तुत किया है। इंसानी समझ की इसी ताकत ने 21वीं सदी तक आते-आते पारंपरिक तरीकों से सीखने की विधा को नए आयाम दे डाले।

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क्या आप शिक्षा की पैमाइश कर सकते हैं?

प्रो. पीटर ग्रे का एक सवाल है – “क्या आप जीवन के अर्थ को परिभाषित कर सकते हैं?” उनका कहना है की, “वक़्त आ गया है कि क़दम वापस खींचें और शिक्षा के उद्देश्य पर गंभीरता से विचार करें।“ इस लेख में प्रो. पीटर ग्रे ने शिक्षा के माप-जोख से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।

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अब बिमला भी आगे पढ़ेगी

उतराखंड के ग्रामीण इलाकों में बेटों को तो जैसे तैसे कॉलेज भेज दिया जाता है पर लड़कियाँ आज भी उच्च शिक्षा के सपने देखने से वंचित हैं। सर्व सुलभ और सस्ती होने के कारण मुक्त व दूरस्थ शिक्षा प्रणाली तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

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अनुभव से सीखना

खुद करके सीखने की प्रक्रिया में सफलता से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण असफलता होती है जो सीखने वाले को समझ की गहराइयों में ले जाती है। हमारी परम्परागत शिक्षा व्यवस्था असफलता को अच्छी नज़र से नहीं देखती और दंडनीय समझती है। यह बात यूं तो हर विषय पर लागू होती हैं लेकिन प्रस्तुत लेख खासकर विज्ञान शिक्षा के सन्दर्भ में है।

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मास्क हमारा, सबका सहारा

उत्तराखंड के ग्रामीण अञ्चल के लोगों को कोरोना से सावधानी इसलिए भी बरतनी होगी क्योंकि यहाँ चिकित्सा सेवाओं का अभाव है जिसके कारण खतरा बड़ सकता है। अतः इन फिल्मों को देखें ओर दिखाएँ, उत्तराखंड को कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाएँ!

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