क्या ऑनलाइन शिक्षा का दौर आ चुका है?

कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जहाँ चाह वहाँ राह। अपनी इस चाहत के चलते मनुष्य ने आजतक अपने मूलभूत अनुभवों से उपजी समझ को ज्ञान के नए-नए रूपों का आकार दिया और धीरे-धीरे उसे परिमार्जित और संश्लेषित कर प्रस्तुत किया है। इंसानी समझ की इसी ताकत ने 21वीं सदी तक आते-आते पारंपरिक तरीकों से सीखने की विधा को नए आयाम दे डाले।

वैश्वीकरण की बयार और खुले बाजार का विचार दरअसल 21वीं सदी में कदम रखते ही कई मायनों में गेमचेज़र साबित हुआ है। व्यावसायीकरण ने खासकर शिक्षा को लेकर आज समाज के नजरिए को पूरी तरह बदल डाला है। जैसे-जैसे आर्थिकी एक खास दिशा की ओर सरक रही है, यह अपने साथ तेजी से सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों को भी ला रही है।

हाल के दशकों में पारंपरिक अध्ययन को कठिन और एक तरह से ऐसे साहसिक कार्य के रूप में देखा जाने लगा है जो व्यक्तित्व विकास और विश्व-दृष्टि विकसित करने में भूमिका तो निभाता है लेकिन वह भी लंबे अंतराल में। जबकि आज की पीढ़ी जिसे मिलेनियल जेनरेशन कहा जा रहा है, में इतना लंबा इंतज़ार करने का धैर्य और इच्छाशक्ति नहीं है। वह ऐसी शिक्षा चाहती है जो अधिगम उन्मुख (लर्निंग ओरिएंटेड – learning oriented) के बजाय श्रेणी उन्मुख (ग्रेड ओरिएंटेड – grade oriented) हो ताकि उसकी दक्षता को सहजता से आँका जा सके और रोजगार पाने की संभावनाएँ अधिकतम हो जाएँ। यूँ भी यह तो जग-जाहिर ही है कि हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली दैनिंदन जीवन-यापन के लिए कौशल और दक्षता विकसित करने में नाकाम साबित हुई है।     

वर्ष 1991 में वर्ल्ड वाइड वेब (www) की खोज ऑनलाइन शिक्षा को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुई। इसने दुनिया में ऑनलाइन कम्यूनिटी बनाने के साथ-साथ वेबसाइटों के उपयोग को तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह बात दीगर है कि ऑनलाइन शिक्षा जहाँ संभावनाओं के अनेकानेक द्वार खोलती है, वहीं यदि यह अनियंत्रित रही तो बाजारीकरण की चुनौती भी पेश करेगी। अभी से अनुमान लगाए जाने लगे हैं कि अगले पाँच वर्षों में अकेले भारत में ही ऑनलाइन शिक्षा का कारोबार लगभग 1.96 बिलियन डालर तक जाने की संभावना है। अध्ययन बताते हैं कि परंपरागत शिक्षा के आधारभूत ढ़ाचे की कमी, गुणवत्ताहीन व निम्न स्तर की शिक्षा व्यवस्था के कारण ऑनलाइन शिक्षा की ओर बढ़ते रुझान से 2021 तक भारत में ऑनलाइन व मुक्त एवं दूरस्थ माध्यम से शिक्षा लेने वालों की संख्या एक करोड़ तक पहुँच जाएगी।

दुनियाँ भर में सामाजिक रुझानो में आ रहे बदलावों पर अध्ययन करने वाले प्रभावशाली अमरीकी थिंकटैंक प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार आज से एक दशक पहले ही अमरीका की 89 प्रतिशत शिक्षण संस्थाओं में किसी न किसी रूप में ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू हो चुके थे और लगभग 32 प्रतिशत विद्यार्थियों द्वारा इन ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को चुना गया। यह भविष्य की शिक्षा के स्वरूप की एक बानगी थी।   

इधर दुनियाँ भर में ऑनलाइन शिक्षा की ओर बढ़ते रुझान और प्रतिस्पर्धा के कारण इस दौर में ऑनलाइन शिक्षा के कई रोचक माडल उभर कर आए हैं। खास तौर पर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर अनुपूरक अध्ययन माडल के साथ साथ अखिल भारतीय सेवाओं, जेईई, नीट सरीखे प्रतिस्पर्धात्मक कार्यक्रमों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी माडल के रूप में। कौशल विकास चाहे वह संवाद के लिए जरूरी सॉफ्ट स्किल हो या विदेशी भाषा सीखना, स्मारक संरक्षण हो या पाक कला, ऑनलाइन प्रशिक्षण ने सीखने सीखने के उपक्रम को नई गति दी है।     

अपनी पाठ्य सामग्री, यू-ट्यूब व्याख्यान, आनलाईन अभ्यास कार्य और वर्चुअल प्रयोगशाला के विकल्प ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा क्षेत्र में प्रभावशाली हस्तेक्षप किया है। दरअसल ऑनलाइन प्रणाली ने अध्यापकों और संरचनात्मक ढांचे की कमी झेल रहे विद्यार्थी को सीखने-सिखाने की अनुपूरक सामग्री बहुत कम लागत में घर पर उपलब्ध कराई है। ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली ने दूसरा बड़ा हस्तेक्षप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने की दिशा में किया है। महंगी फीस देकर घर से दूर महानगरों में तनाव के बीच कोचिंग लेने वाले युवाओं के सामने इस माडल ने नया विकल्प प्रस्तुत किया है। इसी तरह कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को लेकर विभिन्न स्तर के ऑनलाइन पाठ्यक्रमों ने निरंतर सीखने की दिशा में नए अवसर उपलब्ध करवाए हैं।

बाजारीकरण के इस दौर में उपजती शंकाओं और तमाम विध्वंशकारी प्रौद्योगिकियों के आने के बाबजूद पहली बार टेक्नोलोजी ने इंसान को अपनी आवश्यकता के साथ विश्व की व्यापकता को जानने, साझी-समझ बनाने और स्व-शक्तिकरण के भी अवसर दिये हैं। यही नहीं टेक्नोलोजी ने आज की पीड़ी के व्यक्तिवादी और स्वकेंद्रित नजरिए को बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टैक्नोलॉजी की ओर युवाओं के बढ़ते रुझान की प्रवृति और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से आ रहे बदलावों का ही परिणाम है कि आज ऑनलाइन शिक्षा लोकप्रिय होती चली जा रही है। देखा जाय तो आज हर सीखने की इच्छा रखने वाले के सामने ऑनलाइन शिक्षा के अनेक नए विकल्प उपलब्ध हैं। सामान्य पढ़ाई में मदद की जरूरत हो या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सामान्य भाषा सीखने की इच्छा हो या फिर कौशल बढ़ाने और प्रमाणीकरण करने की जरूरत या उच्च शिक्षा पाने का मन, आज युवा के पास ऑनलाइन शिक्षा के अनेक अवसर मौजूद हैं। ये ऐसे विकल्प हैं जो परंपरागत उपाधियों की मानसिकता को धीरे-धीरे अप्रासंगिक बनाते जा रहे हैं।

आज दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुमार हार्वर्ड, प्रिंसटन ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी इंपीरियल कालेज ऑफ मैडिसिन एंड टेक्नालॉजी आदि ने तो कोरसेरा (Coursera), एड एक्स (edX) जैसे बहुत से ऐसे गुणवत्तापूर्ण अवाम उपयोगी आनलाइन सर्टिफिकेट या डिप्लोमा स्तर के खुले पाठ्यक्रम (ओपेन कोर्सेज) शुरू कर दिये हैं, जिनमें कोई भी व्यक्ति निशुल्क पंजीकरण कर ज्ञान अर्जित कर सकता है। हाँ यदि उसे प्रमाणीकरण की आवश्यकता हो तो वह निर्धारित शुल्क का भुगतान कर परीक्षा दे सकता है और प्रमाणपत्र ले सकता है। दरअसल किसी भी उम्र में कहीं से भी गुणवततापूर्ण शिक्षा पाने दी दिशा में यह एक नई संभावना उभर कर आई है।      

यूँ तो भारत में भी सरकार ने ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपने उच्च शोध संस्थानों और यूजीसी के बीच साझेदारी शुरू की है। भारत के शिक्षा मंत्रालय ने एनपीटीएल (NPTL), एनआरओईआर (NROER), एग्रोपीडिया (agropedia), एडू-मूक्स (EduMOOCs), आईआईटीबैक्स(IITBx), ई-पीजी पाठशाला(e-PGPathshala), सीईसी (CEC) और स्वयम (SWAYAM) जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध करवाए हैं। स्वयम (SWAYAM) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का अकेला ऐसा ऑनलाइन प्लेटफार्म है जिसके पाठ्यक्रम क्रेडिट (श्रेयांक) को विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा के अंकों में शामिल किया जा सकता है। यूजीसी के नए दिशा-निर्देश किसी भी पाठ्यक्रम के कुल क्रेडिट (श्रेयांक) का 20 प्रतिशत ऑनलाइन पाठ्यक्रम के द्वारा अर्जित करने की सुविधा देते हैं। इस तरह कोई भी युवा ऑनलाइन शिक्षा का लाभ न केवल अपनी दक्षता बढाने के लिए बल्कि विभिन्न उपाधियाँ अर्जित करने में भी ले सकता है। लेकिन दुनियाँ के अग्रणी विश्वविद्यालयों द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के सामने ये पाठ्यक्रम अपनी विषयवस्तु, गुणवत्ता और प्रस्तुतीकरण की गंभीर कमियों के चलते न कहीं ठहरते और न ही युवाओं को आकर्षित कर पाते हैं।

यह गौरतलब है कि अपने ही देश में सरकारी प्रयासों के मुक़ाबले अनेक निजी प्रयोग बेहद सफल हुए हैं। अनएकेडेमी, बायजू, वेदान्तू को ही ले लें। इन प्लेटफार्म्स ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतरीन ई-पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई है। इतना ही नहीं इन प्लेटफार्म्स ने तकनीकी दृष्टि से आकर्षक और गुणवत्तापूर्ण वर्चुअल व्याख्यानो के द्वारा पठन-पाठन को बेहद सरल और रोचक बनाया है।       

सीखने और ज्ञान बढ़ाने के लिए ऑनलाइन शिक्षा की संभावनाएँ यहीं समाप्त नहीं होती, आज दुनियाँ में कोर्सएरा, एड्क्स, नॉलेज नेटवर्क, लर्नदेट, पावरअप, जीसीएफ लर्नफ्री ओर्ग, बीबीसी ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट जैसे अनेक विदेशी ऑनलाइन शिक्षा के प्लेटफार्म बेहतरीन ई-पाठ्य सामग्री और मूल्यांकन पद्धति एवं द्रुत प्रमाणीकरण के कारण लोकप्रिय बने हुए हैं।

इस बात से इंकार नही किया जा सकता है कि महंगी और पहुँच से बाहर होती जा रही पारम्परिक शिक्षा के दौर में आनलाइन शिक्षा ने पढ़ने और निरंतर सीखने के ढेर सारे अवसर उपलब्ध कराये हैं। हाँ अधिकांश अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रमो का लाभ लेने के लिए अँग्रेजी भाषा की समझ होना जरूरी है। यदि भाषा की बाधा न हो तो आज गाँव-कस्बे का कोई भी व्यक्ति घर बैठे मन चाहे विकल्प चुनकर दुनियाँ के बेहतरीन प्रशिक्षकों और मस्तिष्कों से संवाद स्थापित कर कुछ नया सीखने की कोशिश कर सकता है।

एक-दो डिजिटल प्लेटफार्म्स के उदाहरण से अपनी बात को विस्तार देना चाहूँगा। क्रिएटिव आर्ट के क्षेत्र को ही ले लें। कला के क्षेत्र में सम्मानित और सर्वाधिक लोकप्रिय डोमेस्टिका डाट ऑर्ग एक ऐसा वर्चुअल प्लेटफार्म उभर कर आया है, जिसने दुनिया के 10 लाख से ज्यादा कलाकारों को एक दूसरे से सीखने-सिखाने और अपनी कला परिकल्पना को साझा करने के लिए मंच मुहैय्या कराया है। इस तरह दुनियाँ के किसी भी कोने से क्रिएटिव आर्ट में रुचि में रखने वाला व्यक्ति कला के क्षेत्र में नवीनतम संवाद और नई उभर रही प्रवृतियों से स्वयं को रूबरू करा सकता है। आज कला के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के इच्छुक कलाकारों के लिए डोमेस्टिका अनेक ऑनलाइन पाठयक्रम की पेशकश भी करने लगा है।       

लगभग यही स्थिति रोज़मर्रा की परंपरागत पढ़ाई को लेकर भी उभरी है। दूर देश से पढ़ाई में अपने परिवार को मदद करने के इरादे से की गई सलमान खान की कोशिश आज ‘खान एकेड़ेमी’ के नाम से जाति, धर्म, क्षेत्र और देश जैसी संकीर्ण मानसिकता को ध्वस्त कर अपने को आनलाईन शिक्षा की दुनियाँ में स्थापित करने में कामयाब हुई है। सामान्य पाठ्यक्रम हो या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, खान एकेडेमी सहित अनअकेडेमी, बायजू, आदि ने रोचक पाठ्यक्रम माड्यूल्स पेश कर ऐसे युवाओं के लिए संभावनाओं के दरवाजे खोल दिये हैं जिनके आसपास न तो बेहतर अध्यापक ही हैं और न ही अच्छे प्रशिक्षण या कोचिंग संस्थान। बात यहीं खत्म नहीं होती। सीखने की ललक हो तो टेक्नोलोजी ने ऑनलाइन प्लेटफार्म से इतर भी बहुत से रास्ते दिखाये हैं। यू ट्यूब को ही ले लें। अपने विषय की थोड़ी सी समझ रखने वाला व्यक्ति इसमे उपलब्ध अनगिनत कार्यक्रमों में से उत्कृष्ट सामग्री खोज कर विषय की गहराई में जा सकता है।

आज दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शुमार हार्वर्ड, प्रिंसटन ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय, मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी इंपीरियल कालेज ऑफ मैडिसिन एंड टेक्नालॉजी आदि ने तो बहुत से ऐसे आनलाइन सर्टिफिकेट या डिप्लोमा स्तर के खुले पाठ्यक्रम (ओपेन कोर्सेज) शुरू कर दिये हैं, जिनमें कोई भी व्यक्ति निशुल्क पंजीकरण कर ज्ञान अर्जित कर सकता है। हाँ यदि उसे प्रमाणीकरण की आवश्यकता हो तो वह निर्धारित शुल्क का भुगतान कर परीक्षा दे सकता है और प्रमाणपत्र ले सकता है। दरअसल किसी भी उम्र में कहीं से भी गुणवततापूर्ण शिक्षा पाने दी दिशा में यह एक नई संभावना उभर कर आई है।

हालांकि अनेक आलोचक और आनलाईन शिक्षा प्रणाली से असहमत समूह इसे नव उदारवादी षड्यंत्र के रूप में देखते रहे हैं। वे इसे मनुष्य की सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया के विरुद्ध मानते हैं। लेकिन इस बात से तो इंकार नहीं ही किया जा सकता है कि अपनी तमाम कमजोरियों के होते हुये भी जहाँ-जहाँ टेक्नोलोजी ने अपनी पहुँच बनाई वहाँ-वहाँ सीखने-सिखाने और कौशल विकास के सस्ते और बड़ी आबादी को उपलब्ध हो सकने वाले बेहतर विकल्प तो सामने आए ही हैं। दूर दराज रहने वालों को भी सीखने के समान अवसर प्रदान कर ऑनलाइन शिक्षा एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था के रूप में भी उभरी है। अब महज सीखने के लिए अनेक लोगों के होने या कहीं दूर जा कर सीखने की जरूरत नहीं हैं। अब ना उम्र की कोई सीमा है, ना दूरी का कोई बंधन है। ऑनलाइन सीखने का दौर आ चुका है!

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लेख में उल्लेखित कुछ आनलाईन प्लेटफार्म के वेब लिंक की वर्णमाला सूची

  1. Agropedia – एग्रोपीडिया
  2. Byjus – बायजू
  3. CEC – सीईसी
  4. Coursera – कोरसेरा
  5. Domestika – डोमेस्टिका
  6. edX -एड एक्स
  7. e-PGPathshala – ई-पीजी पाठशाला
  8. IITBx – आईआईटीबैक्स
  9. Khan Academy – खान अकादेमी
  10. MITx – एम आई टी एक्स
  11. NPTL – एन पी टी एल
  12. NROER – एनआरओईआर
  13. Peer 2 Peer University (P2PU) – पीयर टू पीयर यूनिवर्सिटी
  14. SWAYAM – स्वयम
  15. TED-Ed -टेड एड –
  16. Udacity – यूडेसिटी
  17. Udemy – यूडेमी
  18. Unacamedy – अनएकेडेमी
  19. Vedantu – वेदान्तू
गिरिजा पांडे
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One Comment on “क्या ऑनलाइन शिक्षा का दौर आ चुका है?”

  1. महोदय नमस्कार,
    आलेख में आंनलाइन शिक्षा के मौजूदा स्वरूप और आने वाले दौर का बहुत ही वस्तुनिष्ठ और विश्वव्यापी आंकलन बहुत प्रभावी ढंग से किया गया हैं ।
    निस्संदेह आंनलाइन शिक्षा का दौर बड़ी जोर शोर से दस्तक ही नही दे रहा है बल्कि लगभग सभी पठन-पाठन के क्षेत्रों में प्रवेश कर गया हैं ।

    शिक्षा का स्वरूप, प्रसार और सुग्राहयता की सार्वभौमिकता को समय ,काल ,परिस्थिति के अनुसार यदि डिलिवरी में तकनीकी और आर्थिक पहलुओं का समावेश कर उसे द्रुतगामीऔर सर्वसुलभ बनाने से मानव समाज का हित ही होगा ।

    रिगार्ड्स…
    जीवनसवारो

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